Budget 2024: मोदी सरकार 3.0 के आम बजट पेश किए जाने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. 23 जुलाई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से इस सरकार का पहला बजट पेश किया जाएगा. इस बार के बजट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इस बार बीजेपी ने अपने दम पर सरकार नहीं बनाई है. सहयोगी के समर्थन के बाद ही इस बार मोदी सरकार बनाने में सफल रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बजट में सहयोगियों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जा सकते हैं. बजट को लेकर वैसे तो तमाम तरह की अटकलें चल रही हैं. टैक्स में छूट से लेकर अन्य क्षेत्रों में बड़े फैसलों तक, लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय बजट का पितामह कौन है. शायद नहीं तो अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आखिर कौन है फादर ऑफ इंडिया बजट.
कौन है भारतीय बजट का पितामह
भारत ने 15 अगस्त 1947 में आजाद हवा में सांस ली. इसके साथ ही भारत ने अपने विकास की पहली सीढ़ी पर कदम बढ़ाना भी शुरू कर दिए. इसके बाद 26 नवंबर 1947 को देश का पहला बजट पेश किया गया. जाहिर इस बजट को जिसने पेश किया वहीं भारतीय बजट का पितामह बन गया.
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शनमुखम चेट्टी ना्म के शख्स ने ही देश का पहला बजट तैयार किया और पेश भी किया. यही वजह है कि उन्हें फादर ऑफ इंडिया बजट कहा गया. शनमुखम चेट्टी का जन्म गुलाम भारत में हुआ था. उन्होंने एक धनवान परिवार में 1892 में तमिलनाडु में जन्म लिया.
चेट्टी के पिता कांडास्वामी की बात करें तो वह कोयम्बटूर के चेट्टियार मिल के मालिक थे. ऐसे में एक कारोबारी परिवार में जन्मे शनमुखम चेट्टी का बचपन संपन्नता के साथ बीता. यही वजह है रही कि उन्हें अच्छे स्कूल और इसके बाद एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन भी मिला. चेट्टी को मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला मिला और यहीं से उन्होंने अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की.
राजनीति में बनाना था करियर, पिता का था कुछ और ही प्लान
चेट्टी को राजनीति में ही करियर बनाना था, लेकिन उनके पिता का ख्वाब कुछ और ही था. चेट्टी के पिता उन्हें सिविल सर्विसेज में भेजने का मन बना रहे थे, लेकिन चेट्टी चाहते थे कि वह नेता बनकर समाज की सेवा करें. उन्होंने कोयम्बटूर म्यूनिसिपैलिटी में बतौर पार्षद चुनाव लड़ा और जीते. इसके बाद वाइस चेयरमैन भी बने. 1920 से 1921 तक वह मद्रास लेजिस्लेटिव एसेंबली में मेंबर भी रहे.
इस दल से लड़े विधानसभा चुनाव
चेट्टी ने इसके बाद विधानसभा चुनाव का रुख किया. इसके लिए उन्होंने जस्टिस पार्टी का टिकट हासिल किया और चुनाव जीते. हालांकि 1922 में उन्होंने विधानसभा से रिजाइन कर दिया.
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इसके बाद उन्होंने स्वराज पार्टी का दामन थामा और आगे बढ़ते गए. वह केंद्रीय विधानसभा के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष भी बने. हालांकि 1935 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद जब भारत आजाद हुआ तो तात्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में जगह दी. यही नहीं नेहरू ने उन्हें वित्त मंत्री भी बनाया. इसके बाद उन्होंने 1947 में पहला बजट भाषण दिया. 1953 में चेट्टी का हार्ट फेल होने की वजह से निधन हो गया.
Source : News Nation Bureau