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लोकसभा चुनाव

Loksabha Speaker: कौन बनता है लोकसभा का स्पीकर, क्या क्या है पॉवर और कितनी होती है सैलरी?

Loksabha Speaker: कैसे लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव होता है, साथ ही इनके क्या कार्य होते हैं. ये सभी जानकारी आपको इस आर्टिकल में डिटेल्स में दी जा रही है.

Updated on: 10 Jun 2024, 07:20 PM

नई दिल्ली:

Loksabha Speaker: लोकसभा चुनाव के बाद मोदी ने पीएम पद की शपथ ले ली, साथ ही पीएम के कैबिनेट मंत्री ने भी राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ समारोह में शपथ ली. अब नवनिर्वाचित सासंद लोकसभा में बैठेंगे. हर बार की तरह इस बार भी लोकसभा के स्पीकर का चुनाव होना है. लोकसभा स्पीकर का अर्थ होता है, लोकसभा का अध्यक्ष जो निचले सदन को चलाने में अहम भूमिका निभाता है. कैसे लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव होता है, साथ ही इनके क्या कार्य होते हैं. ये सभी जानकारी आपको इस आर्टिकल में डिटेल्स में दी जा रही है. लोकसभा स्पीकर का पद एक संवैधानिक पद है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 99 में स्पीकर की शक्तियां बताई गई है.

स्पीकर से पहले बनते हैं प्रोटर्म

लोकसभा स्पीकर का चुनाव सभी MP के द्वारा सर्वसहमति के साथ किया जाता है. जो सबसे ज्यादा बार एमपी बनकर आते हैं उनका नाम स्पीकर के लिए चुना जाता है. इस बार ओम बिड़ला, विरेंद्र कुमार और गणेश सिंह का नाम सामने आ रहा है. जिसे सबसे ज्यादा एमपी वोट करेंगे उन्हें स्पीकर बनाया जाता है. स्पीकर बनने से पहले एक प्रोटर्म स्पीकर बनाया जाता है, जो स्पीकर के चुनाव में मदद करता है. प्रोटर्म स्पीकर राष्ट्रपति द्वारा एक सीनियर एमपी को बनाया जाता है. ये प्रोटर्म स्पीकर सदन में मौजूद एमपी की वोटिंग के जरिए स्पीकर का चुनाव करते हैं. साथ ही व्यवहार में प्रोटर्म स्पीकर ही लोकसभा के सदस्यों को शपथ दिलाता है. लोकसभा के पहले प्रोटर्म स्पीकर G.V मावलंगर थे और 17वीं लोकसभा के प्रोटर्म स्पीकर वीरेंद्र कुमार थे. लोकसभा स्पीकर की सैलरी विकिपीडिया के मुताबिक, 4,50,000 है. 

लोकसभा अध्यक्ष के कार्य

-लोकसभा अध्यक्ष लोकसभा में धन विधेयक का निर्धारण करता है.
-संयुक्त बैठक की अध्यता करता है.
-लोकसभा के कार्य का संचालन करना भी स्पीकर का काम है.-  जैसे सदन की सभा को स्थगित करना, किसी भी सदस्य को छुट्टी देना, लोकसभा के सदस्यों का निलंबन आदि.
-निर्णायक मत का अधिकार स्पीकर के पास होता है- यदि किसी भी बिल को पास करने के लिए दोनों सदन से समान बहुमत मिलता है तो ऐसे में स्पीकर के निर्णायक मत का इस्तेमाल किया जाता है, और इस -निर्णायक मत से ही बिल पास होगा या नहीं इसका फैसला लिया जाता है. 
-दल बदल के संबंध में भी निर्णय लेता है.

आजाद भारत के पहले लोकसभा स्पीकर 

लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे. पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार बनीं थी और दूसरी महिला स्पीकर सुमित्रा महाजन थी. सबसे ज्यादा समय तक लोकसभा के अध्यक्ष बलराम जाखड़ रहे थे.17वीं लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला थे.  

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