खालिस्तान समर्थक कनाडाई नागरिक जसपाल अटवाल को लेकर कनाडा सरकार के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि कनाडा के आरोप बेबुनियाद हैं और इसतरह की आधारहीन बातें मंजूर नहीं की जाएंगी।
गौरतलब है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत दौरत पर आए थे और जसपाल अटवाल को लेकर उनकी यात्रा पर विवाद शुरू हो गया था।
ट्रूडो के भारत दौरे के दौरान मुंबई में अटवाल की एक तस्वीर उनकी पत्नी सोफी और कनाडा के मंत्री अमरजीत सोढ़ी के साथ सामने आ गई थी जिसपर सवाल उठने लगे थे।
फोटो के सार्वजनिक होने के बाद यह बात सामने आई थी कि अटवाल कनाडाई पीएम के साथ ही भारत आया था। राजधानी दिल्ली में कनाडाई उच्चायुक्त की ओर आयोजित डिनर पार्टी में अटवाल को न्योता पर भी विवाद हुआ था जिसके बाद इसे वापस ले लिया गया था।
इसी को लेकर कनाडा में पीएम ट्रूडो के दफ्तर ने मीडिया के लिए प्रेस बीफिंग का आयोजन किया था। इस फ्रेस ब्रीफिंग में कनाडाई सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अटवाल की मौजूदगी के पीछे भारत के सुरक्षा एजेंसियों का हाथ था जो कि नहीं चाहते थे कि पीएम मोदी के साथ ट्रूडो सरकार के गहरे रिश्ते दिखे। इसलिए कनाडाई सरकार की छवि खराब करने के लिए यह सब किया गया।
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कनाडाई संसद में जब ट्रूडो से इस पर विपक्षी सांसदों ने ट्रूडो से सवाल किया था उन्होंने अधिकारी के बयान का समर्थन कहते हुए कहा, जब हमारी सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ऐसा कुछ कहते हैं तो वह जानते हैं कि सच बोल रहे हैं।
कनाडा के इस बयान पर भारत सरकार ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर लगाए गए ये आरोप पूरी तरह गलत हैं।
गौरतलब है कि जिस अटवाल को लेकर यह विवाद हो रहा है उसपर खालिस्तान के लिए चल रही मुहिम का समर्थक माना जाता है। अटवाल प्रतिबंधित संगठन इंटरनैशनल सिख यूथ फेडरेशन का सदस्य है इसे 2003 में बैन कर दिया गया था। इसके अलावा अटवाल पर 1985 में एक ऑटोमोबाइल फ्रॉड केस में भी दोषी पाया गया है।
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Source : News Nation Bureau