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Sawan 2025 Photograph: (Freepik)
सावन का महीना हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है. इस महीने में भगवान शिव की पूजा का विधान है. वहीं इस महीने से कुछ खास परंपराएं जुड़ी हुई है. इस साल सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो गई है. इसका समापन 9 अगस्त को होगा. सावन महीने को लेकर हिंदू धर्म में कई रीति-रिवाज हैं, जिनका पालन करना बड़ा ही शुभ माना गया है. इस महीने में कुंवारी कन्याएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं सोमवार व्रत रखती हैं वहीं विवाहित स्त्रियां श्रृंगार करती हैं हरी-हरी चूड़ियां पहनती हैं. ऐसी ही एक परंपरा सावन में मायके जाने की भी है.
घर का स्नेह
शादी के बाद नई दुल्हन को सावन में उसके मायके भेजना उस घर के प्यार, अपनापन और सुरक्षा का अनुभव करने के अवसर होता है. वहीं यह काफी शुभ माना जाता है. इस परंपरा का सदियों से पालन किया जा रहा है.
घर का भाग्य
दरअसल, बेटी से ही घर का भाग्य जुड़ा होता है. ऐसे में सावन के महीने में जब बेटियां अपने मायके आती हैं, तो उनका भाग्य घर को नियंत्रित करता है. इससे पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ती हैं और सुख-समृद्धि आती है. ससुराल-मायके के बीच स्थिति ठीक रहती है.
हिंदू धर्म के मुताबिक
वहीं हिंदू धर्म के मुताबिक बेटियों को घर के लिए बहुत ही शुभ माना गया है और उन्हें घर की लक्ष्मी कहा जाता है. ऐसे में जब बेटियां शादी के बाद ससुराल चली जाती हैं तो मायके में उदासी छा जाती है. वहीं सावन में बेटी के मायके आने पर घर में फिर से खुशहाली आ जाती है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के बाद पहला सावन मायके में बिताने से दांपत्य जीवन भी सुखमय होता है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है. मायके में रहकर इस दौरान नवविवाहित बेटी को भगवान शिव और मां गौरी की पूजा करनी चाहिए. व्रत रखना चाहिए.
बहू की आजादी
बहुत सी जगहों पर यह परंपरा सास-ससुर और पति द्वारा निभाई जाती है जो स्वयं बहू को मायके भेजते हैं. यह दर्शाता है कि नई बहू को सम्मान और आजादी दी जा रही है.
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