बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे बाहुबलियों के सहारे NDA चुनाव लड़ना चाह रही है. जहां एक तरफ अनंत सिंह, आनंद मोहन और सुनील पांडे की NDA में एंट्री हई. वहीं विपक्ष में खलबली शुरू हो गई. NDA में बाहुबलियों की एंट्री होने के बाद से RJD ने इसका जमकर विरोध किया.
पार्टी के प्रवक्ता मृतुंजय तिवारी ने कहा कि NDA में बाहुबलियों की एंट्री हुई है लेकिन उससे कोई फायदा नहीं होने वाला है. बिहार की जानता तेजस्वी यादव में अपना भविष्य देख रही है नीतीश कुमार में नहीं.
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जनता अब तेजस्वी यादव में अपना भविष्य देख रही
एक तरफ जहां RJD का यह कहना है कि बिहार की जनता अब तेजस्वी यादव में अपना भविष्य देख रही है तो वहीं दूसरी तरफ़ JDU का कहना है कि अब बिहार में बाहुबली नाम का कोई अस्तित्व नहीं रहा जो RJD बाहुबली की बात करती है वो बताए सुरेंद्र यादव रीत लाल यादव ये सब कौन हैं. ये सब कौन से मठ के मठाधीश हैं. इसका जवाब दें, बिहार में कोई भी बाहुबली शब्द अब नहीं चलता. यहां नीतीश कुमार का शासनकाल है. ये भी पढे़ं: ब्रजभूषण सिंह को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, 26 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई
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बाहुबली की बात RJD न करें
एक तरफ जहां सवाल BJP पर उठा तो BJP विधायक और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नवीन ने कहा ये बाहुबली की बात RJD न करें उनके शासनकाल में क्या होता था ये सभी ने देखा है, उनके पार्टी में ज्यादातर बाहुबली लोग हैं. तो अब देखना होगा कि बिहार में ये बाहुबली शब्द और बाहुबली की एंट्री से क्या आने वाला विधानसभा चुनाव बदलता है. क्या नीतीश कुमार फिर से 2005 वाली राजनीति करते हैं या फिर बिहार की जनता तेजस्वी यादव पर भरोसा करती है