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बस्तर में मलेरिया से जूझते सुरक्षाबल, नक्सल मोर्चे पर दोहरी चुनौती

बस्तर में मलेरिया का प्रकोप सुरक्षाबलों के लिए एक गंभीर चुनौती है. मानसून के मौसम में मलेरिया के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे निपटने के लिए सुरक्षाबलों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है.

Updated on: 04 Jul 2024, 01:20 PM

highlights

  • बस्तर में मलेरिया से जूझते सुरक्षाबल
  • नक्सल मोर्चे पर दोहरी चुनौती
  • बस्तर में मानसून में बढ़ रहा प्रकोप

 

 

New Delhi:

Bastar News: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सुरक्षाबल इस समय मलेरिया के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहे हैं. विषम परिस्थितियों में नक्सलियों को पटखनी देने वाले ये जवान मानसून के मौसम में मलेरिया की चपेट में आकर अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं. बस्तर संभाग में मलेरिया से ग्रसित जवानों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. इसके अलावा, अब सीआरपीएफ और पुलिस के अधिकारी भी मलेरिया से प्रभावित हो रहे हैं.

एसटीएफ के 17 जवान मलेरिया पॉजिटिव

बस्तर में मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. बस्तर संभाग के संवेदनशील क्षेत्रों में नक्सलियों से लोहा ले रहे जवान तेजी से मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं. बस्तर जिले में स्थित एसटीएफ कैम्प के 17 जवान मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनका इलाज बस्तर के सरकारी अस्पताल में चल रहा है. हालांकि सभी जवानों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. बस्तर एसपी सलभ सिन्हा ने बताया कि एसटीएफ के ये सभी जवान नक्सल ऑपरेशन में नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके में तैनात थे.

मच्छरों के काटने से बीमार होने के बाद, जब जवान मुख्यालय लौटे, तो मेडिकल जांच में करीब 20 जवानों की रिपोर्ट मलेरिया पॉजिटिव पाई गई. इनमें से तीन जवानों को छुट्टी दे दी गई है, जबकि अन्य का इलाज जारी है. इसके अलावा सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर में नक्सल ऑपरेशन से लौटे कुछ जवानों में भी मलेरिया की पुष्टि हुई है और उनका भी इलाज चल रहा है.

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ऑपरेशन के दौरान सतर्कता के निर्देश

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि मानसून के मौसम में बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों और घने जंगलों में जवानों को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है. पिछले सालों की तुलना में मलेरिया से बचाव के लिए जवानों द्वारा काफी सतर्कता बरती जा रही है. बावजूद इसके, ऑपरेशन के दौरान जवानों को कई विषम परिस्थितियों से जूझना पड़ता है और ऐसे में मच्छरों के काटने से वे बीमार हो रहे हैं.

नक्सल ऑपरेशन से लौटने के बाद जवानों का मेडिकल चेकअप किया जाता है और मलेरिया पॉजिटिव पाए जाने वाले जवानों को चिकित्सकों की निगरानी में रखकर बेहतर इलाज किया जाता है. आईजी ने बताया कि लगातार जवानों को ऑपरेशन के दौरान सतर्कता बरतने की हिदायत दी जा रही है. मच्छरों से बचाव के लिए जरूरी दवाइयां और ऑडोमोस जैसी जरूरी चीजें अपने साथ रखने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं.

मलेरिया के खिलाफ जंग

मलेरिया के बढ़ते मामलों ने सुरक्षाबलों के लिए न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं. नक्सलियों से लड़ाई लड़ते हुए मलेरिया का सामना करना सुरक्षाबलों के लिए दोहरी चुनौती बन गया है. मलेरिया के बढ़ते मामलों के बावजूद, जवानों का हौसला कम नहीं हो रहा है और वे पूरी तत्परता और दृढ़ता से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं.