स्वतंत्रता दिवस पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीरों को सलाम, हरिओम पवार की कविता ने भरा जोश

Independence Day 2025: कवि ने अपने संबोधन में कहा, 'मैंने भगवान राम और कृष्ण को नहीं देखा, लेकिन मैंने अपने असली रक्षक देवता यानी कि सीमा पर तैनात फौजी को जरूर देखा है.

Independence Day 2025: कवि ने अपने संबोधन में कहा, 'मैंने भगवान राम और कृष्ण को नहीं देखा, लेकिन मैंने अपने असली रक्षक देवता यानी कि सीमा पर तैनात फौजी को जरूर देखा है.

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Yashodhan.Sharma
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Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों के बीच देशभक्ति का जज्बा चरम पर दिखाई दिया. कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि हरिओम पवार ने अपने ओजस्वी काव्य पाठ से माहौल को भावुक और जोशीला बना दिया.

शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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हरिओम पवार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित अपनी कविता के माध्यम से उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए दुश्मन को करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का परचम और पहलगाम की बहन-बेटियों के घावों का मरहम है.

वीरता और बलिदान को किया नमन

कवि ने अपने संबोधन में कहा, 'मैंने भगवान राम और कृष्ण को नहीं देखा, लेकिन मैंने अपने असली रक्षक देवता यानी कि सीमा पर तैनात फौजी को जरूर देखा है. इन्हीं के बल पर हम आजादी के पर्व और अन्य त्योहार मनाते हैं.' उन्होंने सैनिकों की वीरता, त्याग और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि सेना के कारण ही भारत आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है और अब घाटी में आतंक का बोलबाला नहीं चलने वाला.

कविता के दौरान पवार ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अब जो भी आतंकी भारतीय सीमा में घुसेगा, उसका अंजाम ओसामा बिन लादेन जैसा होगा यानी कि बिना कफन दफन. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ केवल शक्ति और दृढ़ संकल्प ही कारगर हथियार हैं, क्योंकि भेड़िया कभी शाकाहारी नहीं हो सकता.

कार्यक्रम के बीच जब उन्होंने शहीदों की पत्नियों और माताओं के दर्द को पंक्तियों में पिरोया, तो उपस्थित हर शख्स की आंखें नम हो गईं. उन्होंने वीरांगनाओं के साहस का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे कुछ विधवाओं ने अपने पतियों की अर्थी को कंधा देकर इतिहास रचा.

हर नागरिक को निभानी होगी सैनिक की भूमिका

हरिओम पवार ने कहा, 'जो कौम वतन के लिए मरने को तैयार नहीं, उसे आजादी में जीने का अधिकार नहीं.' उन्होंने यह संदेश भी दिया कि संकट की घड़ी में हर नागरिक को सैनिक की भूमिका निभानी चाहिए.

इस खास अवसर पर मौजूद सशस्त्र सीमा बल के जवानों और उनके परिवारों ने पवार की कविता पर जमकर तालियां बजाईं. कार्यक्रम का समापन ब्रास बैंड की देशभक्ति धुनों के साथ हुआ, जिसने माहौल को और भी गौरवपूर्ण बना दिया.

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