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लोकसभा चुनाव

Uttarakhand: बीजेपी की कद्दावर नेता का निधन, राजनीतिक दलों में शोक की लहर

Uttarakhand: भारतीय जनता पार्टी के लिए आई दुःखद खबर, उत्तराखंड के केदारनाथ से विधायक शैलारानी रावत का 68 की उम्र में निधन

Updated on: 10 Jul 2024, 08:48 AM

New Delhi:

Uttarakhand: देश के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आई है. दिन निकलते ही यहां एक दिग्गज नेता की मौत से राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. दरअसल केदारनाथ से भारतीय जनता पार्टी की विधायक शैलारानी  रावत का निधन हो गया है. रावत ने 68 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि बीते कुछ वक्त से वह बीमार चल रही थीं. देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका उपचार भी चल रहा था. देर रात साढ़ बजे के आस-पास उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और इसके बाद संभली नहीं. बताया जा रहा है कि रावत को बीते दो दिन से वैंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं देखने को मिल रहा था. 

क्या थी समस्या
मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी विधायक शैलारानी की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया था. वर्ष 2017 के दौरान चुनावी प्रचार के वक्त रावत गिर गईं थी, इसी के चलते उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया था. बताया जा रहा है कि ये चोट इतनी गंभीर थी कि इसमें उनकी शरीर में मांस फटने की शिकायत भी हुई और इसी से कैंसर की स्थिति भी बन गई.

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इसकी वजह से उन्हें उठने-बैठने में भी काफी परेशानी हो रही थी. इसी के चलते वह अन्य बीमारियों की भी जकड़ में आ गई थीं. हालांकि बाद में इस फ्रैक्चर की सर्जरी कर दी गई थी. तीन साल बाद ठीक होकर उन्होंने एक बार फिर चुनाव लड़ा. 

बीजेपी विधायक के पॉलिटिकल करियर पर एक नजर
केदारनाथ से बीजेपी विधायक रहीं शैलारानी रावत ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी का हाथ थामकर की थी. पहली बार वह वर्ष 2012 में विधानसभा पहुंचीं थीं. उस दौरान उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार थी और इसी में उन्होंने आगे चलकर बगावत का रास्ता अख्तियार किया और अपने साथ 9 अन्य एमएलए को लेकर उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया.

2017 में हारीं चुनाव, 2022 में शानदार वापसी

बीजेपी की ओर से उन्हें वर्ष 2017 में केदारनाथ सीट से टिकट दिया गया, लेकिन यहां पर रावत का जादू नहीं चला और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा. हालांकि इसके बाद एक बार फिर बीजेपी ने रावत पर भरोसा जताया और उन्हें एक बार फिर इसी सीट से मौका दिया गया, इस बार शैलारानी ने शीर्ष नेताओं को मायूस नहीं किया और उन्होंने शानदार जीत दर्ज की.