चीन ने भारत को नसीहत दी है कि वो चीन के साथ अपने संबंधों की विषमताओं में स्वीकार करे। सरकारी चीनी मीडिया का कहना है कि वो चीन से इसकी सीख ले सकता है कि उसने कैसे पीछे रहकर अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों से किस तरह से लाभ उठाया है।
सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में कहा है, 'भारत चीन से एक सबक यह ले सकता है कि वो खुद के साथ ईमानदार बने। आर्थिक और भूराजनीतिक ताकत में विषमता किसी भी द्विपक्षीय संबंध के लिए स्वाभाविक बात है।'
ग्लोबल टाइम्स ने 22 फरवरी को हुए चीन-भारत सामारिक संवाद के नतीजों का विश्लेषण करते हुए यह लेख प्रकाशित किया है।
भारत और चीन के बीच हुए इस सामरिक संवाद का मकसद द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के साथ ही एनएसजी और मसूद अजहर के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच के मतभेदों को दूर करने की थी।
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लेख में कहा गया है, यह विषमता विकासित हो रहे संबंधों में रोड़ा नहीं बनना चाहिये।
अखबार ने कहा, 'अमेरिका के साथ संबंधों में पीछे की सीट पर होने को लेकर चीन ने शायद ही कभी शिकायत की हो। इस तरह ससे चीन ने जल्दी सफलता पाई है।'
अखबार की भारत को यह भी सलाह है कि वो अपनी उम्मीदों को कम करे और द्विपक्षीय संबंधों को ज्यादा महत्व दे।
अखबार ने आगे कहा, 'कहानी का सार सीधा है। मौजूदा खाई अगर चौड़ी दिख भी रही है तो चिंता का विषय नहीं होना चाहिये, महत्वपूर्ण यह है कि कैसे इस खाई को पाटा जाए।' सरकारी मीडिया ने याद दिलाया कि भारत-चीन दोनों को एक दूसरे के विकास का काफी लाभ मिला है।
अखबार में कहा गया है, 'विषमता को मानना बराबरी की भावना से ग्रसित होने के ज्यादा कठिन है, लेकिन इससे भारत को काफी सफलता मिल सकती है।'
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Source : News Nation Bureau