अमेरिकी ‘न्यूक स्निफर’ विमान रूस के परमाणु बेस के पास मंडराया, बढ़ी परमाणु तनाव की आशंका

अमेरिका और रूस के बीच परमाणु तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. एक विशेष अमेरिकी निगरानी विमान, जिसे न्यूक स्निफ़र कहा जाता है.

अमेरिका और रूस के बीच परमाणु तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. एक विशेष अमेरिकी निगरानी विमान, जिसे न्यूक स्निफ़र कहा जाता है.

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Ravi Prashant
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रूस अमेरिका यूएसए टेंशन Photograph: (sm)

अमेरिका और रूस के बीच परमाणु तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. अमेरिका का एक विशेष निगरानी विमान, जिसे न्यूक स्निफर कहा जाता है, हाल ही में रूस के संवेदनशील परमाणु बेसों के बेहद करीब देखा गया. ये घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब रूस ने औपचारिक रूप से 1987 की ऐतिहासिक INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) संधि से खुद को अलग कर लिया. 

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जानकारी के मुताबिक, अमेरिका का WC-135R “Constant Phoenix” विमान ब्रिटेन के RAF Mildenhall एयरबेस से उड़ान भरकर नॉर्वे के पश्चिमी तट से होता हुआ मुरमांस्क और नोवाया जेमल्या के बीच बैरेंट्स सागर में कई चक्कर लगाते हुए करीब 14 घंटे बाद लौट आया.

इस मिशन का कॉल साइन था COBRA29.इस विमान का काम हवा में मौजूद रेडियोएक्टिव तत्वों की पहचान करना होता है, जो किसी संभावित परमाणु परीक्षण के संकेत माने जाते हैं. यह विशेष विमान परमाणु विस्फोट के बाद बनने वाले रेडियोधर्मी बादलों से डेटा इकट्ठा करता है.

क्या रूस कर सकता है नया परमाणु परीक्षण?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधि इस ओर इशारा कर सकती है कि रूस अपने खतरनाक 9M730 Burevestnik क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर सकता है. यह मिसाइल परमाणु ऊर्जा से चलती है और लंबी दूरी तक उड़ान भर सकती है, साथ ही कई न्यूक्लियर वारहेड्स ले जाने में सक्षम बताई जाती है. बता दें कि रूस ने आखिरी बार 1990 में परमाणु परीक्षण किया था.

रणनीतिक तौर पर अहम इलाका

मुरमांस्क क्षेत्र रूस का एक अति-संवेदनशील इलाका है, जो नाटो सदस्य देशों नॉर्वे और फिनलैंड की सीमा से सटा हुआ है. यहां रूस की Northern Fleet समेत कई समुद्री और वायुसेना के परमाणु अड्डे स्थित हैं. यह इलाका रूस की परमाणु रणनीति का अहम हिस्सा है.

INF संधि से हटने के पीछे ट्रंप-मेवेदेव टकराव

रूस द्वारा INF संधि छोड़ने का ऐलान ऐसे वक्त में आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए दो न्यूक्लियर सबमरीन रूस के पास उपयुक्त क्षेत्रों में तैनात करने की बात कही.

यह प्रतिक्रिया रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के एक भड़काऊ बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने अमेरिका को ‘Dead Hand’ सिस्टम की याद दिलाई. एक ऐसा पुराना सोवियत सिस्टम जो परमाणु हमला होने पर अपने आप जवाबी हमला सुनिश्चित करता है.

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